माँस, मदिरा और व्याभिचार., कुछ और नहीं वरन् हताशा, निराशा, असफलता और अतृप्ति वश आत्महत्या करने के राक्षसी और हीनतापूर्ण तरीके मात्र हैं ।

हम तो महावीर हैं।

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